इस्लाम धर्म के संस्थापक और उनका इतिहास Founder of Islam Religion and Their History

 


क्यों मनाया जाता हैं बारहरवीउलअव्वल का त्योहार हर वर्ष कौन हैं इस्लाम धर्म के संस्थापक आखिर वे अल्लाह ईश्वर के इतने करीब क्यों हैं फूल जानकारी स्टेप बाई स्टेप हीनदे मे 

बारहरवीउलअव्वल 

बारहरवीउलअव्वल का त्योहार हर वर्ष उर्दू महिना बारहरवीउलअव्वल के 12-th तारीख को हिन्दी कलेनडेर के हिसाब से लगभग अक्टूबर महीने मे मनाया जाता है यह मुसलमानों का सबसे बड़ा और खुशियों का धार्मिक त्योहार हैं हमारा कुरान पाक कहता हैं

https://www.earnbazar.co.in/2021/10/mohammad.rasullalah.ka.jeewan.parichay....html


की मुसलमानों को सही राह दिखाने वाले हुजूर आका नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म हैं और यह त्योहार इसलीय मनाया जाता हैं क्योंकि हमारे हुजूर आका नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म का जन्म बारहरवीउलअव्वल के महीने मे 12 तारीख को हुआ था

और इस त्योहार को लोग अलग अलग बहुत नामों से पुकारते हैं ( बरहवी शरीफ, बारहरवीउलअव्वल, बारहवफ़ात, ईदमीलादुननवी) आदि नामों से से आज दुनिया मे यह त्योहार प्रसिद्ध व प्रचलित हैं

खासकर हुजूर आका नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म का जन्म अरब के लोगों जुल्मों फरेब से दूर करने तथा उन्हे सुधारने के लिए हुआ था और उन्होंने लोगों को बताया की वे अल्लाह तबारूक ताला के आखिरी नवी हैं और इसके बाद कयामत तक कोई दूसरा नबी नही आने वाला हैं 

जबकि उस समय अरब देश मे कबीलाई संस्कृति का अनपढ़ गवार जाहिलाना का दौर थाऔर वहाँ के लोग बुतों की पूजा करते थे वहाँ हर कबीले का अपना एक अलग धर्म था उनका एक अलग ही ईश्वर था उनके देवी देवता भी अलग अलग ही थे कोई मूर्तिपूजक तो कोई आग्निपूजक कोई जलपुजक था यहूदियों और ईसाइयों के कबीले भी एक अलग धर्म के शिकार थे                             

ईश्वर अल्लाह को छोड़कर संस्कृति की पूजा करते थे और उस समय अरब देश मे हिंसा लड़ाई झगड़े मकरो फरेब जुल्मों गुस्ताखी का बोलबाला था उस समय वहाँ के औरते बच्चे बहु बेटियाँ महफूज नहीं थे उनके जान माल की कोई सुरक्षा नहीं थी उस समय अरब देश एक गहरे अंधकार मे डूब हुआ था

अरब देश के लोगों को इस अंधकार से बाहर निकलने के लिए हमारे हुजूर आका नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म का जन्म हुआ और अल्लाह तबारूक ताला ने उन्हे अपना पैगंबर बनाया और आज उन्ही के जन्म मुबारक (जन्म दिन) के खुशी मे लोग बारह रबी उल अव्वल मनाया जाता हैं जो इस साल 19अक्टूबर 2021 को मनाया जाएगा      

नवी करीम सललल्लाहु अलईह वसलल्म का जीवन परिचय और इतिहास

इस्लाम धर्म की स्थापना करने वाले तथा मुसलमानों को सही रास्ता दिखने वाले हुजूर आका नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म का जन्म लगभग 8 जून 570 ईस्वी तथा उर्दू महिना बारहरवीउलअव्वल के 12-th तारीख को अरब देश के (मक्का शरीफ) नामक शहर मे एक साधारण परिवार मे हुआ था

हुजूर आका नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म के पिता का नाम अब्दुल्लाह इब्न् अब्दुल मुतलिब था और हुजूर आका नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म के माँ का नाम आमिना था हुजूर आका नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म

के (वालिद) अर्थात माँ बाप का इंतकाल हो गया और हमारे नवी करीम सललल्लाहु अलईह वसलल्म काफी छोटे थे उनकी उम्र करीब 6 साल की थी अब उनका पालन पोषण उनके दादा और दाई हलीमा ने मिलकर किया और हमारे नवी मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म बड़े हुए तो वे अरब देश

के कबीलों के जुल्मों फरेब जो कुछ इस प्रकार थे (वे कबीले वाले शराब पीते और अपने लड़कियों को जिंदा जमीन मे दफना देते थे और जुआ खेलते और जब हार जाते तो अपने बहु बेटियों पत्नियों को दाँव पर लगाते थे वे बहुत ही जुल्मों फरेब करते थे) इस जुल्मों फरेब को देखकर हुजूर आका नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म बहुत परेशान हुए 

और अपने मन को शांति देने के लिए वे एक पहाड़ी के खोह मे जाकर अपने रब ताला की इबादत करते हैं और अल्लाह तबारूक ताला को याद करते थे और उस खोह के पास दूसरा और कोई भी यहाँ तक की कोई परिंदा भी नहीं जाता था

और हमारे नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म रोज प्रतिदिन उस खोह मे जाते और अल्लाह तबारूक ताला की इबादत करते एक दिन मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म को उस खोह मे हज़रत जिबराईल अलहिस सलाम तसरीफ़ लाते हैं और उन्हे सलाम पेश करते हैं

और एक किताब देते हैं जिसका नाम कुरान पाक हैं जो अरबी भाषा मे लिखी हुई होती हैं जिबराईल अलहिस सलाम कहते हैं की आप लोगों को इस किताब अर्थात (कुरान पाक) मे लिखी हुई चीजों को बताओ और बताओ की आप अल्लाह तबारूक ताला के सबसे प्रिय और आखिरी पैगमबर हो हमारे नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म

अब जिबराईल के बताए गए बातों को ध्यान मे रखते हुए लोगों को कुरान पाक के बारे मे बताना शुरू करते हैं और कुछ लोग उन पर विश्वास करते हुए अर्थात उनके चाहने वाले उनके बताए गए बातों पर अमल करते हैं तो कुछ कुरेश लोग ने नाराजगी जताये लेकिन हमारे नबी करीम हुजूर आका सललल्लाहु अलईह वसलल्म

को इस नाराजगी से से कोई फरक नहीं पड़ा और उन्होंने अपना काम जारी रखा आखिरकार धीरे धीरे करके किसी तरह हमारे नवी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म मक्का शरीफ तथा मदीना शरीफ के लोगों तक अल्लाह ताला के फ़रिश्ते जिबराईल अलहिस सलाम के द्वारा दिए गए संदेश को पहुचाया जिससे काफी लोग सहमति हुए और ईमान ले आए

और वे मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म के बताए गए नक्से कदम पर चलने लगे और अब उनका बहुत बड़ा समाज (ग्रुप) बन चुका था इस बात को मक्का के कुरेश लोग देख कर जलते थे और इसी बात को लेकर काफी जंग हुई जो आज भी प्रसिद्ध हैं (जंग ए खैबर, जंग ए बदर, जंग ए वहब ) आदि हैं

तथा इसके बाद उन्होंने लोगों को बताया की हमारा रब एक हैं और हम सभी हजरत आदम अलहिस सलाम के बेटे है और वे मिट्टी के बने हैं और लोगों को नमाज पढ़ने के बारे मे बताया और उन्होंने बड़ी बड़ी मस्जिदों के निर्माण अपने हाथों से किए जो आज भी दुनिया मौजूद हैं जिनके नाम कुछ इस प्रकार हैं (मस्जिदए नबवी, मस्जिदए अकशा) और फिर धीरे धीरे दुनिया के लोग कुरान पाक को पढ़ने लिखने लगे

जिसके वजह से लोगों को सही गलत का फरक समझ मे आने लगा और वे सही रास्ते को अपनाते गए और इस तरह हमारे नबी करीम मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलम ने लगभग 63 साल के उम्र मे दुनिया से पर्दा फास कार लिया उनके वफ़ात के बाद तक लगभग अरब देश इस्लाम के सूत्र मे बांध चुका था 

और आज भी उनके कहने वाले उनके बताए गए तौर तरीकों के मुताबिक जिंदगी व्यतीत करते हैं तथा आज भी दुनिया मे मोहम्मद रसूलल्लाह सललल्लाहु अलईह वसलल्म के चाहने वालों की संख्या बहुत हैं और वे आज भी दुनिया मे काफी चर्चित हैं


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